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Bihar Flood: बिहार में अगस्त में बारिश कम, फिर भी गंगा-गंडक समेत कई नदियां क्यों उफनीं? समझिए पूरा कारण

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | अगस्त में बिहार में बारिश सामान्य से कम रहने के बावजूद गंगा, गंडक, कोसी समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने की वजह जानिए।

पटना, 4 सितंबर। बिहार में इस साल अगस्त के दौरान बारिश सामान्य से काफी कम रही, लेकिन राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ाता रहा। गंगा, गंडक, कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक, सोन, पुनपुन और घाघरा जैसी नदियों में पानी बढ़ा और कई स्थानों पर जलस्तर खतरे के निशान के आसपास या उसके ऊपर पहुंच गया। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठता है कि जब बिहार में बारिश कम हुई, तो नदियों में इतना पानी आया कहां से? दरअसल, बिहार की नदियों को समझने के लिए सिर्फ यहां हुई बारिश को देखना पर्याप्त नहीं है। इन नदियों का जलग्रहण क्षेत्र बिहार से बाहर तक फैला है और खासकर नेपाल तथा हिमालयी इलाकों में हुई तेज बारिश का सीधा असर बिहार की नदी व्यवस्था पर पड़ता है।

अगस्त में बारिश कम, लेकिन नदी का पानी ज्यादा

अगस्त में बिहार में करीब 155 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य बारिश से लगभग 33 प्रतिशत कम रही। इसका मतलब यह हुआ कि राज्य को इस महीने औसत के मुकाबले कम वर्षा मिली।

आमतौर पर बारिश कम होने पर लोगों को लगता है कि नदियों में भी पानी कम होगा। लेकिन बड़ी नदियों के मामले में यह जरूरी नहीं है। नदी में पहुंचने वाला पानी कई अलग-अलग इलाकों से आता है। किसी नदी का स्रोत और उसका जलग्रहण क्षेत्र सैकड़ों किलोमीटर दूर तक हो सकता है।

इसलिए बिहार के किसी जिले में बारिश कम होने के बावजूद उसी जिले से गुजरने वाली नदी का जलस्तर बढ़ सकता है।

बिहार की नदियों पर नेपाल का सीधा असर

बिहार की कई महत्वपूर्ण नदियां नेपाल और हिमालयी क्षेत्र से निकलती हैं या उनके जलग्रहण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा वहां है। पहाड़ी इलाकों में जब थोड़े समय में बहुत ज्यादा बारिश होती है तो पानी तेजी से ढलान की ओर बहता है।

छोटी धाराएं और पहाड़ी नदियां मिलकर बड़ी नदियों में पानी पहुंचाती हैं। यही पानी आगे चलकर बिहार के मैदानी इलाकों में प्रवेश करता है।

यही वजह है कि नेपाल में बारिश होने के बाद बिहार में उसी समय बारिश हो, यह जरूरी नहीं है। नेपाल में बारिश पहले हो सकती है और उसका असर कुछ समय बाद बिहार की नदियों में दिखाई दे सकता है।

फ्लैश फ्लड ने बढ़ाई परेशानी

पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बहुत अधिक पानी आने से फ्लैश फ्लड की स्थिति बन सकती है। इसमें पानी सामान्य स्थिति की तुलना में बहुत तेजी से नीचे की ओर बढ़ता है।

इस पानी का बड़ा हिस्सा नदियों में पहुंचता है। जब एक साथ कई छोटी धाराओं का पानी किसी बड़ी नदी में आने लगता है, तो नदी का प्रवाह अचानक बढ़ सकता है।

यही कारण है कि बिहार में स्थानीय स्तर पर बारिश कम होने के बावजूद गंडक और कोसी जैसी नदियों में तेजी से पानी बढ़ने की स्थिति बन सकती है।

गंडक का पानी गंगा तक पहुंचाता है दबाव

गंडक बिहार की प्रमुख नदियों में है और इसका जलग्रहण क्षेत्र नेपाल तक फैला हुआ है। नेपाल में भारी बारिश होने पर गंडक में पानी की आवक बढ़ सकती है।

गंडक में बढ़ा पानी आगे गंगा नदी में पहुंचता है। अगर उसी समय गंगा में पहले से पानी अधिक है और दूसरी सहायक नदियां भी बढ़ रही हैं, तो स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

इसलिए गंडक के जलस्तर में बढ़ोतरी को केवल सीमावर्ती इलाकों की समस्या मानना सही नहीं होगा। इसका प्रभाव नदी के आगे के हिस्सों में भी दिखाई दे सकता है।

कोसी का पानी भी तेजी से बदल सकता है स्थिति

कोसी नदी का बड़ा जलग्रहण क्षेत्र नेपाल और हिमालयी क्षेत्र में है। इस इलाके में भारी बारिश होने पर नदी में पानी तेजी से बढ़ सकता है।

कोसी का स्वभाव पहले से ही काफी गतिशील माना जाता है। ऊपरी क्षेत्र में बारिश और पानी की आवक बढ़ने के बाद इसका प्रभाव बिहार के मैदानी इलाकों में दिखाई देता है।

इसी वजह से कोसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए केवल स्थानीय मौसम देखना पर्याप्त नहीं होता। ऊपर के जलग्रहण क्षेत्र में बारिश और नदी के प्रवाह की जानकारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

सिर्फ गंडक और कोसी नहीं, कई नदियों में बढ़ा पानी

इस बार स्थिति को समझने के लिए एक और महत्वपूर्ण बात है। बिहार में केवल एक नदी का जलस्तर नहीं बढ़ा।

कई नदियों में एक साथ पानी बढ़ने से दबाव व्यापक हुआ।

गंगा में जलस्तर बढ़ा।

गंडक में पानी की आवक बढ़ी।

कोसी में उफान की स्थिति बनी।

बागमती का जलस्तर बढ़ा।

बूढ़ी गंडक में भी पानी बढ़ा।

सोन और पुनपुन ने भी चिंता बढ़ाई।

घाघरा समेत दूसरी नदियों में भी जलस्तर में बदलाव देखा गया।

जब एक ही समय में कई नदियां बढ़ती हैं, तो निचले इलाकों पर बाढ़ का दबाव ज्यादा हो जाता है।

पटना में बारिश कम, फिर भी गंगा क्यों बढ़ सकती है?

इसे एक आसान उदाहरण से समझिए।

मान लीजिए पटना में किसी दिन बहुत कम बारिश हुई। इसके बावजूद गंगा का जलस्तर बढ़ सकता है। इसका कारण यह है कि गंगा का जलग्रहण क्षेत्र बहुत बड़ा है।

ऊपरी इलाकों में हुई बारिश का पानी अलग-अलग नदियों और धाराओं से होते हुए गंगा में पहुंचता है। इस पानी को पटना तक पहुंचने में समय लगता है।

इसलिए पटना में आज बारिश कम होना इस बात की गारंटी नहीं है कि गंगा का पानी भी आज या कल कम रहेगा।

बारिश रुकने के बाद भी नदी क्यों बढ़ती है?

नदी के जलस्तर और बारिश के बीच समय का अंतर होता है।

पहले ऊपरी क्षेत्र में बारिश होती है। फिर पानी छोटी नदियों में पहुंचता है। इसके बाद छोटी नदियों का पानी बड़ी नदी में जाता है। बड़ी नदी में पानी बढ़ने के बाद उसका असर नीचे के इलाकों में दिखाई देता है।

इस पूरी प्रक्रिया में कई घंटे या उससे अधिक समय लग सकता है।

इसी वजह से कई बार लोगों को लगता है कि बारिश तो रुक गई, फिर नदी का पानी क्यों बढ़ रहा है। वास्तव में ऊपर से पानी की आवक जारी रहती है और उसका असर नीचे धीरे-धीरे पहुंचता है।

बैराज की भूमिका भी महत्वपूर्ण

नदियों के पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए कई महत्वपूर्ण स्थानों पर बैराज बनाए गए हैं। ऊपर से पानी की आवक बढ़ने पर बैराजों पर लगातार निगरानी रखी जाती है।

गंडक नदी के मामले में वाल्मीकिनगर बैराज महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नदी में पानी बढ़ने पर बैराज के जलप्रवाह और गेटों की स्थिति पर नजर रखी जाती है।

इसी तरह कोसी नदी के प्रवाह को लेकर भी बैराज स्तर पर निगरानी की जाती है।

यहां एक बात समझना जरूरी है कि बैराज अपने आप बारिश का पानी पैदा नहीं करते। वे पहले से मौजूद पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने की व्यवस्था का हिस्सा हैं। जब ऊपर से बड़ी मात्रा में पानी आता है तो उसके प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ जाती है।

एक साथ कई कारण मिलकर बनाते हैं बाढ़ की स्थिति

बिहार में बाढ़ की स्थिति को सिर्फ यह कहकर नहीं समझा जा सकता कि राज्य में कितनी बारिश हुई।

इसके पीछे कई स्तर पर कारण काम करते हैं—

नेपाल और हिमालयी क्षेत्र में बारिश।

ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी की आवक।

फ्लैश फ्लड के कारण अचानक बढ़ा प्रवाह।

गंडक और कोसी जैसी नदियों में बढ़ा पानी।

सहायक नदियों से मुख्य नदियों में पहुंचता अतिरिक्त पानी।

बैराजों और नदी तंत्र के जरिए पानी का प्रवाह।

जब इनमें से कई परिस्थितियां एक साथ बनती हैं तो बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।

यही वजह है कि बिहार में कम बारिश के बावजूद बाढ़ का खतरा बना

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे आसान निष्कर्ष यही है कि बिहार की नदियों का पानी सिर्फ बिहार में हुई बारिश पर निर्भर नहीं करता।

नेपाल और हिमालयी इलाकों में हुई बारिश का पानी नदियों के जरिए बिहार पहुंचता है। रास्ते में कई छोटी-बड़ी नदियां इसमें शामिल होती हैं। फिर यही पानी गंगा समेत बड़ी नदियों के प्रवाह को बढ़ाता है।

इसलिए बिहार में किसी समय बारिश कम होने के बावजूद नदी का जलस्तर बढ़ सकता है और कई इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

आगे भी निगरानी जरूरी

मानसून के दौरान नदी का जलस्तर लगातार बदलता रहता है। इसलिए संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन की चेतावनी पर नजर रखनी चाहिए।

नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि स्थानीय बारिश कम होना नदी के खतरे के कम होने का संकेत नहीं है।

ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में बारिश, नेपाल से आने वाला पानी, बैराज की स्थिति और नदी का मौजूदा जलस्तर—इन सभी को एक साथ देखने के बाद ही बाढ़ की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सकता है।

बिहार में अगस्त की कम बारिश के बावजूद नदियों में बढ़ा पानी इसी बड़े नदी तंत्र की तस्वीर दिखाता है। यहां बारिश की बूंदें भले बिहार में कम गिरी हों, लेकिन पहाड़ों और ऊपरी इलाकों से आया पानी नदियों के रास्ते मैदानी बिहार तक पहुंचकर हालात बदल सकता है।

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बिहार में बाढ़, बारिश और नदियों के जलस्तर से जुड़ी ताजा खबरें Alam Ki Khabar पर पढ़ते रहें।

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